भारत 26वें संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP 26) से आगे
Heena Samant, Research Assistant, VIF
COP26 का परिचय

वैश्विक जलवायु परिवर्तन पर बातचीत के लिए 2021 एक महत्त्वपूर्ण वर्ष है। इसी साल बहुप्रतीक्षित 26वां संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन 31 अक्टूबर से 12 नवम्बर 2021 तक ब्रिटेन के ग्लासगो शहर में होने जा रहा है। यह शिखर सम्मेलन विभिन्न कारणों से बहुत महत्त्व रखता है। सबसे पहले तो इसके भागीदारों से अपेक्षा की जा रही है कि वे पेरिस जलवायु समझौते 2015[1] के अनुसार ग्रीन हाउस गैस (जीएचजी) उत्सर्जन को कम करने के लिए अपनी योजनाओं को अपडेट करें और इसकी एक रूपरेखा बनाएं। दूसरा, सम्मेलन का लक्ष्य सदी के मध्य तक ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन के वैश्विक शुद्ध शून्य स्तर को सुरक्षित करना और उत्सर्जन की वैश्विक दर को 2 डिग्री सेल्सियस से 1.5 डिग्री के दायरे में बनाए रखना है, जिसका दूसरे शब्दों में मतलब है कि दुनिया के देशों को 2030 तक उत्सर्जन की दर में कटौती की महत्त्वाकांक्षा के साथ आगे बढ़ना है, जो सदी के मध्य तक इसको शुद्ध शून्य तक पहुंचने के साथ संरेखित हैं।[2] तीसरा, यूएनएफसीसीसी से जलवायु वित्त कोष पर समीक्षात्मक विमर्श किए जाने की उम्मीद है, जिसका पेरिस समझौते के तहत धनी राष्ट्रों को प्रति वर्ष $100 डॉलर की धनराशि उन विकासशील देशों की सहायता के रूप में दिए जाने का प्रस्ताव है।[3] अंत में, आगामी शिखर सम्मेलन को जलवायु परिवर्तन को नियंत्रण में लाने के लिए दुनिया का सबसे अच्छा आखिरी मौका माना जा रहा है।[4] जलवायु परिवर्तन पर यह शिखर सम्मेलन अंतरसरकारी पैनल (आइपीसीसी) द्वारा ‘क्लाइमेंट चेंज 2021: दि फिजिकल सायंस बेसिस’ शीर्षक से जलवायु परिवर्तन पर छठी आकलन रिपोर्ट के पहले भाग के प्रकाशन के मद्देनजर और भी महत्त्वपूर्ण हो गया है। भौतिक विज्ञान पर आधारित रिपोर्ट स्पष्ट रूप से बताती है कि पृथ्वी ग्रह के पास जलवायु परिवर्तन के बिगड़ते प्रभावों का अनुभव करने के लिए अधिक समय नहीं बचा है।[5] रिपोर्ट में कहा गया है कि "आने वाले दशकों में कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में गहरी कटौती न की गई तो 21 वीं सदी के दौरान ही वैश्विक तापमान की 1.5 डिग्री सेल्सियस और 2 डिग्री सेल्सियस के पार हो जाएगी।”[6] भारत ने भी एक सफल शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए ब्रिटेन को अपना समर्थन दिया है, जो इस वर्ष सम्मेलन की मेजबानी करेगा।[7]

COP26 के आगे भारत में महत्त्वपूर्ण विकास

जहां तक भारत का संबंध है, तो जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में अब तक कई महत्त्वपूर्ण विकास हुए हैं। इसमें COP26 के अध्यक्ष श्री आलोक शर्मा के इस वर्ष दो दौरों के साथ ही बाइडेन प्रशासन में जलवायु मामलों के लिए राष्ट्रपति के विशेष दूत जॉन केरी की यात्रा भी शामिल है। नई दिल्ली ने बाइडेन प्रशासन द्वारा जलवायु पर अप्रैल में आयोजित लीडर्स समिट में और जुलाई में, G20 देशों की जलवायु और ऊर्जा मंत्रिस्तरीय बैठक में भी भाग लिया था। भारत के लिए, लीडर्स समिट का मुख्य आकर्षण "भारत-अमेरिका जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा एजेंडा 2030 भागीदारी" पर निवेश जुटाने में मदद करने, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन करने और हरित सहयोग को सक्षम बनाने के लिए शुभारंभ करना था।[8] वहीं दूसरी ओर, भारत ने G 20 जलवायु और ऊर्जा मंत्रिस्तरीय बैठक के दौरान पर एक मुखर पक्ष लिया, जिसमें इसने जी-20 से आग्रह किया कि जिन राष्ट्रों का प्रति व्यक्ति ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन विश्व के प्रति व्यक्ति गैस उत्सर्जन के औसत से अधिक है, उन्हें प्रति व्यक्ति उत्सर्जन को कम करने और उन्हें अगले कुछ वर्षों में इसको विश्व औसत तक लाने के लिए जिससे कि पृथ्वी ग्रह पर कार्बन का स्थान कुछ हद तक खाली कर देंगे और वे विकासशील देशों की विकासात्मक आकांक्षाओं का समर्थन करेंगे।[9] इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 75वें स्वतंत्रता दिवस पर लालकिले से दिए गए अपने भाषण में एक महत्वपूर्ण घोषणा की थी। इसमें उन्होंने भारत को ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात के लिए एक वैश्विक केंद्र बनाने के लिए राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन की स्थापना की घोषणा की थी।[10]

नई दिल्ली ने बार-बार दोहराया है कि वह पेरिस समझौते के तहत अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अपनी भूमिका निभा रहा है। यह प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा विभिन्न मंचों पर दिए गए भाषणों और जी-20 देशों के जलवायु और ऊर्जा मंत्रिस्तरीय बैठक में भारत के केंद्रीय ऊर्जा, नवीन और नवीकरणीय मंत्री श्री आरके सिंह के भाषणों में भी बहुत स्पष्टता से दोहराया गया था।उदाहरण के लिए, प्रधानमंत्री श्री मोदी ने जलवायु पर नेताओं के शिखर सम्मेलन में अपने संबोधन में 2030 तक 450 GW के भारत के महत्त्वाकांक्षी अक्षय ऊर्जा लक्ष्य का न केवल उल्लेख किया बल्कि स्वच्छ ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, वनीकरण और जैव विविधता के क्षेत्रों में भारत द्वारा उठाए गए विभिन्न साहसिक कदमों के बारे में भी बताया।[11] इसी तरह, G-20 के जलवायु और ऊर्जा मंत्रिस्तरीय बैठक में अपने संबोधन में श्री आरके सिंह ने कहा कि भारत ने अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) लक्ष्यों को पूरा करने में महत्त्वपूर्ण प्रगति की है और कहा कि 2030 तक उत्सर्जन में लक्षित कमी 33-35 फीसदी की बजाए भारत ने पहले ही 2005 के स्तर की 28 फीसदी को हासिल कर लिया है और नवीकरणीय ऊर्जा से स्थापित 38.5 फीसदी क्षमता को भी प्राप्त कर लिया है।[12]

भारत को वैश्विक जलवायु परिवर्तन से निबटने के प्रयासों में एक मजबूत खिलाड़ी रहा है। नई दिल्ली ने विश्व स्तर पर, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आइएसए), लीडआइट, और आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन (सीडीआरआई) जैसी विभिन्न पहलों को प्रोत्साहित किया है।[13] ऐसा करके, इसने खुद को उस स्थिति में ला दिया है, जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे वैश्विक जलवायु परिवर्तन वार्ता के लिए एक महत्त्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में पहचाना जा रहा है। तथ्य यह है कि श्री आलोक शर्मा और श्री जॉन केरी दोनों ही इस वर्ष दो बार कुछ महीनों अंतराल में भारत दौरे पर आए थे, जो भारत के इसी महत्त्व के बारे में बताता है। समझा जाता है कि दोनों नेताओं ने भारत की इस दशक के अंत तक 450GW अक्षय ऊर्जा महत्त्वाकांक्षा का स्वागत और समर्थन किया। वास्तव में, श्री शर्मा ने अगस्त में अपनी दूसरी यात्रा के दौरान अपनी महत्त्वाकांक्षी हरित हाइड्रोजन परियोजना में भारत के साथ सहयोग करने के लिए ब्रिटेन की इच्छा व्यक्त की।[14] अपने एक बयान में, श्री आलोक शर्मा ने कहा कि:

"पेरिस समझौते के तहत नए सिरे से कार्रवाई का प्रदर्शन करने के लिए ग्लासगो में दुनिया के एक साथ आने पर भारत को एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानी है। इंटरनेशनल सोलर एलायंस (आइएसए) और कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएशन इंफ्रास्ट्रक्चर (सीडीआरआई) सहित भारत का नेतृत्व बेहद महत्त्वपूर्ण है क्योंकि हम COP 26 से पहले और इसके बाद में वैश्विक लचीलापन बनाना चाहते हैं।"[15]

हालांकि इस तथ्य में कोई संदेह नहीं है कि भारत जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभा रहा है और इसकी भूमिका को दुनिया स्वीकार भी कर रही है, पर एक और तर्क जो सामने आ रहा है, वह है शुद्ध शून्य उत्सर्जन के लिए राष्ट्र की प्रतिबद्धता का। इसे लेकर अभी तक कोई घोषणा नहीं की गई है। भारत कार्बन डॉयऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन के मामले में चीन औऱ अमेरिका के बाद तीसरा बड़ा देश है।[16] चीन पहले से ही 2060 तक शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन प्राप्त करने के लक्ष्य के लिए प्रतिबद्ध है।[17] वहीं दूसरी ओर, संयुक्त राज्य अमेरिका ने अप्रैल में घोषणा की कि वह 2030 तक अपने ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को 50 से 52 फीसदी के बीच कम करने का लक्ष्य रखेगा। वह पहले से ही 2050 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन की दिशा में बढ़ रहा है।[18] इसने भारत पर जबरदस्त दबाव डाला है और सभी की निगाहें अब आगामी COP 26 सम्मेलन पर लगी हैं कि यह शुद्ध शून्य उत्सर्जन के संबंध में देश क्या निर्णय लेगा। यह तर्क दिया जा रहा है कि श्री शर्मा और श्री केरी दोनों ने अपनी हाल की भारत यात्राओं के दौरान अपने संबंधित भारतीय समकक्षों को इसके लिए राजी करने का प्रयास किया।

क्या भारत 2050 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन लक्ष्य के लिए प्रतिबद्ध होगा?

ऐतिहासिक रूप से, नई दिल्ली इस तथ्य का दृढ़ समर्थक रही है कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने और वैश्विक तापमान वृद्धि को धीमा करने के लिए विकासशील और विकसित देशों के पास विभिन्न स्तरों के दायित्व और जिम्मेदारियां हैं।[19] फिलहाल भारत की स्थिति वैसी ही नजर आ रही है। एक बयान में, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री, श्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि "भारत का मानना है कि जलवायु कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित किया जाना चाहिए। भारत वह दृढ़ता से वकालत करता है कि यूएनएफसीसीसी और पेरिस समझौते में विकासशील देशों के संदर्भ में बरते गए अंतर एवं संचालन की नमनीयता को निर्णय लेने के मूल में होना चाहिए।"[20] इसके अतिरिक्त, हाल ही में आइपीसीसी रिपोर्ट (एआर6) के प्रकाशन के बाद,श्री यादव ने कहा कि केवल शुद्ध शून्य तक पहुंचना ही पर्याप्त नहीं है, क्योंकि शुद्ध शून्य तक संचयी उत्सर्जन ही उस तापमान को निर्धारित करता है, जो आइपीसीसी रिपोर्ट में लाया गया है और यह भारत की स्थिति को साबित करता है कि आज दुनिया जिस जलवायु संकट का सामना कर रही है, उसका स्रोत ऐतिहासिक संचयी उत्सर्जन हैं।[21] यह तथ्य श्री आर के सिंह द्वारा G20 ऊर्जा और जलवायु मंत्रिस्तरीय बैठक में दिए गए भाषण में भी स्पष्ट था, जहां उन्होंने उन देशों द्वारा विकासशील देशों की विकासात्मक आकांक्षाओं के लिए कार्बन स्थान खाली करने के बारे में बात की थी, जिनका प्रति व्यक्ति ग्रीन हाउस गैस (GHG) उत्सर्जन अधिक है, जैसा कि ऊपर उल्लेख किया गया है।

हालांकि, दुनिया जिस बड़े सवाल के जवाब की प्रतीक्षा कर रही है, वह यह है कि क्या भारत आगामी ग्लासगो सम्मेलन में शुद्ध शून्य उत्सर्जन की प्रतिज्ञा करेगा या नहीं? इसका उत्तर अनिश्चित है, विशेषज्ञों के बीच इस पर बहुत चर्चा हो रही है, और प्रतीत होता है कि इस विषय पर सबकी राय मिलीजुली है। उदाहरण के लिए, गेटिंग नेट जीरो एप्रोच फॉर इंडिया एट COP26’ शीर्षक लेख के सहलेखक श्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया इस बात की पुरजोर वकालत करते हैं कि भारत को COP पर अपना 'नेट जीरो' लक्ष्य घोषित कर देना चाहिए। लेख में कहा गया है कि नई दिल्ली इसे 2065-70 तक प्राप्त कर ले सकती है, जबकि ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन चरम पर होगा लेकिन यह भी अमीर देशों पर निर्भर करेगा कि वे अगले कुछ वर्षों में जलवायु वित्त को प्रतिवर्ष दोगुना $200 अरब डॉलर कर दें।[22] श्री मोंटेक अहलुवालिया के उस पेपर में दिया गया एक और दिलचस्प तर्क यह है कि भारत को अपनी विकासात्मक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जित करने के लिए स्थान की आवश्यकता है, इसमें कोई "राजनयिक आधार" नहीं है क्योंकि कई व्यवहार्य गैर-उत्सर्जक ऊर्जा विकल्प उपलब्ध हैं।[23] इसी तरह का तर्क एक अन्य प्रमुख जलवायु परिवर्तन विशेषज्ञ, श्री अरुणाभ घोष द्वारा प्रस्तुत किया गया है, जो शुद्ध शून्य उत्सर्जन के भारत के विचार को बढ़ावा देते हैं, लेकिन वे इसे 2050 तक पाने को जरूरी नहीं मानते हैं। उनके विचार से महत्त्वपूर्ण है लक्ष्य का निर्धारण ताकि इसे लघु और मध्यम अवधि में पूरा किया जा सके।[24] इसके विपरीत, विज्ञान और पर्यावरण महानिदेशक, सुश्री सुनीता नारायण, शुद्ध शून्य उत्सर्जन अवधारणा को "भव्य व्याकुलता" के रूप में वर्णित करती हुईं इस विचार को ही पूरी तरह से खारिज कर देती हैं।[25]

निष्कर्ष

यह तर्क दिया जा रहा है, विशेष रूप से, IPCC’s AR6 रिपोर्ट के प्रकाशन के बाद कि सदी के मध्य तक देशों को शून्य उत्सर्जन के लिए एक साथ लाना, वैश्विक तापमान को 2 डिग्री सेल्सियस लेकिन अधिमानतः 1.5 डिग्री सेल्सियस बनाए रखने का एकमात्र तरीका है। इसके अलावा, इस प्रवृत्ति को देखते हुए कई देश इस दिशा में आगे बढ़े हैं और अपने शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य घोषित किए हैं। इसने भारत को भी इस लक्ष्य में भागीदार कर दिया है और भविष्य के उसके इरादे के बारे में जानने की उत्सुकता जगा दी है क्योंकि वर्तमान में यह दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार्बन उत्सर्जक देश है। हालांकि नई दिल्ली के तर्क तार्किक प्रतीत होते हैं कि कार्बन न्यूट्रल बनने का लक्ष्य निर्धारित करना एक आवश्यकता बन गई है और यह समय की भी आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त, शुद्ध शून्य उत्सर्जन भी वायु प्रदूषण से निपटने के भारत के प्रयासों के अनुरूप है, जो हाल के वर्षों में एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा बन गया है। चूंकि भारत उन देशों में से एक है,जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से सबसे ज्यादा दुष्प्रभावित होने जा रहा है, लिहाजा उसे वर्तमान प्रवृत्ति की ओर बढ़ने और शुद्ध शून्य उत्सर्जन के लिए अपने लक्ष्य की घोषणा करने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

टिप्पणियां

[1]संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन, ब्रिटेन 2021. ‘व्हाट इज ए COP?’, [ऑनलाइन] उपलब्ध: https://ukcop26.org/uk-presidency/what-is-a-cop/.
[2]संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन कॉन्फ्रेंस ब्रिटेन 2021. ‘COP26 गोल्स’, [ऑनलाइन] उपलब्ध: https://ukcop26.org/cop26-goals/.
[3]एलिसन डोइगो। ‘व्हाट इज COP26, हू विल अटेंड इट एंड व्हाई डज इट मैटर?’, एनर्जी एंड क्लाइमेट इंटेलिजेंस यूनिट, [ऑनलाइन] उपलब्ध: https://eciu.net/analysis/briefings/international-perspectives/what-is-cop26-who-will-attend-it-and-why-does-it-matter.
[4]नंबर 1.
[5]अवीक रॉय 2021. ‘विलिंग टू पार्टनर विद इंडिया ऑन इट्स हाइड्रोजन गोल: COP 26 प्रेसिडेंट आलोक शर्मा’, हिंदुस्तान टाइम्स, [ऑनलाइन] उपलब्ध: https://www.hindustantimes.com/india-news/cop26-alok-sharma-hydrogen-energy-climate-change-green-climate-fund-101629213956153.html
[6]आइपीसीसी सिक्सथ एसेसमेंट रिपोर्ट 2021. https://www.ipcc.ch/report/ar6/wg1/downloads/report/IPCC_AR6_WGI_SPM.pdf.
[7]इंडिया टुडे वेब डेस्क 2021. ‘इंडिया बैकस यूके फॉर सक्सेजफुल COP 26 समिट, सेज इट बिलीव्स इन क्लाइमेट एक्शन’, इंडिया टुडे, [ऑनलाइन] उपलब्ध: https://www.indiatoday.in/science/story/india-backs-uk-for-successful-cop-26-summit-says-it-believes-in-climate-action-1842445-2021-08-18.
[8]विदेश मंत्रालय 2021. ‘एड्रेस वाई प्राइम मिनिस्टर एट दि लीडर्स समिट ऑन क्लाइमेट 2021’, [ऑनलाइन] उपलब्ध: https://mea.gov.in/Speeches-Statements.htm?dtl/33820/Address_by_Prime_Minister_at_the_Leaders_Summit_on_Climate_2021.
[9]प्रेस इंफार्मेशन ब्यूरो 2021. ‘G20 एनर्जी एंड क्लाइमेट ज्वाइंट मिनिस्ट्रियल मिटिंग’, भारत सरकार, [ऑनलाइन] उपलब्ध: https://pib.gov.in/PressReleseDetailm.aspx?PRID=1738317.
[10]प्रेस इंफार्मेशन ब्यूरो 2021. ‘दि प्राइम मिनिस्टर, मि. नरेन्द्र मोदी एड्रेस्ड दि नेशन फॉर्म दि रैम्पार्टस ऑफ दि रेड फोर्ट ऑन दि 75 इंडिपेंडेंस डे ’, भारत सरकार, [ऑनलाइन] उपलब्ध: https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1746070.
[11]नंबर 8।
[12]नंबर 9।
[13]नंबर 8।
[14]नंबर 5।
[15]ब्रिटिश हाई कमीशन 2021. ‘COP26 प्रेसिडेंट विजिट्स इंडिया अहेड ऑफ लैंडमार्क क्लाइमेट समिट’, [ऑनलाइन] उपलब्ध: https://www.gov.uk/government/news/cop26-president-visits-india-ahead-of-landmark-climate-summit.
[16]ग्रीनहाउस गैस एमिशन वाई कंट्री 2021. वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू, [ऑनलाइन] उपलब्ध: https://worldpopulationreview.com/country-rankings/greenhouse-gas-emissions-by-country.
[17]नंदिनी शर्मा 2020. ‘नेट जीरो वाई 2060: व्हाट इट मिंस फॉर चाइना’, ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन, [ऑनलाइन] उपलब्ध: https://www.orfonline.org/expert-speak/net-zero-by-2060-what-it-means-for-china/.
[18]ओलिवर मिलमैन 2021. ‘बाइडेन वो टू स्लैश यूएस एमिशंस वाई हाफ टू मिट ‘एक्जिटेंसनल क्राइसिस ऑफ ऑवर टाइम’, दि गार्डियन, [ऑनलाइन] उपलब्ध: https://www.theguardian.com/us-news/2021/apr/22/us-emissions-climate-crisis-2030-biden#:~:text=Shortly%20before%20the%20start%20of,to%20also%20raise%20their%20ambition.
[19]ऊर्मि गोस्वामी 2015. ‘पेरिस COP21: रिकॉगनिशन ऑफ“कॉमन बट डिफिरिंशिएटेड रिस्पॉंसिबिलिटिज” की अचीवमेंट्स ऑफ इंडिया’, दि इकोनॉमिक टाइम्स, [ऑनलाइन] उपलब्ध: https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/paris-cop21-recognition-of-common-butdifferentiated-responsibilities-key-achievement-of-india-/articleshow/50173196.cms.
[20]पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय 2021। ‘इंडिया एक्सटेंड्स फुल सपोर्ट टू दि यूके फॉर ए सक्सेफुल COP26 टु बी हेल्ड इन ग्लासगो इन नवम्बर’, प्रेस इंफार्मेशन ब्यूरो, [ऑनलाइन] उपलब्ध: https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1746903.
[21]पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय 2021। ‘इंडिया वेलकम दि इंटरगवर्मेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) वर्किंग ग्रुप1 कंट्रीब्यूशन टू दि सिक्सथ एसेसमेंट रिपोर्ट’, प्रेस इंफार्मेंशन ब्यूरो, [ऑनलाइन] उपलब्ध: https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1744221.
[22]चेतन चौहान 2021. ‘इंडिया कैन अचीव नेट जीरो कॉर्बन एमिशन टारगेट वाइ 2065-70: स्टडी’, हिंदुस्तान टाइम्स, [ऑनलाइन] उपलब्ध: https://www.hindustantimes.com/india-news/india-can-achieve-net-zero-carbon-emissions-target-by-2065-70-study-101632076022693.html.
[23]वही।
[24]सिमरिन सिरुर 2021. ‘इंडिया शुड कमिट टू नेट जीरो एमिशन, बट नॉट वाई 2050, क्लाइमेट एक्सपर्ट्स से’, दि प्रिंट, [ऑनलाइन] उपलब्ध: https://theprint.in/environment/india-should-commit-to-net-zero-emissions-but-not-by-2050-climate-expert-says/735047/.
[25]सेंटर फॉर साइंस एंड इनवायर्मेंट 2021. ‘रेज योर डोमेस्टिक एंबीशन, मि. बाइडेन वॉक दि टॉक: सीएसई आस्क एज दि यूएस प्रेसिडेंट’स ग्लोबल क्लाइमेट समिट बिगिन्स’, प्रेस रीलीज, [ऑनलाइन] उपलब्ध: https://www.cseindia.org/raise-your-domestic-ambition-mr-biden-walk-the-talk-cse-asks-as-the-us-president-s-global-climate-summit-begins-10805.


Translated by Dr Vijay Kumar Sharma (Original Article in English)
Image Source: https://eustafor.eu/event/cop26-un-climate-change-conference-uk-2021/

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